Kanak Agarwal
Fantasy Inspirational Others
ये कलम भी रोती है,,
फुर्सत हो तो कभी सुनना..
हंसी, खुशी, मुस्कुराहट,
प्रेम-प्रीति छोड़कर..
जब लिखते हो इससे...
झूठ, बेईमानी, चोरी, डकैती,
व्यभिचार और दुराचार
तब..
सिसकती है ये..!
पर फिर भी,
सच कहने की हिम्मत
रखती है ये....
रोशन दीवाली
प्रकृति और स्...
तस्वीर युद्ध ...
इश्क़
प्रेम
हम तो बस तेरे...
मनमर्जी
मुझ में रब बस...
झरना
जिंदगी
आँखें, जब किसी की पानी से भरी हुई परातें बन जाएं... आँखें, जब किसी की पानी से भरी हुई परातें बन जाएं...
हां यह सच है कि आज इजहार-ए- इश्क करते हैं तुमसे। हां यह सच है कि आज इजहार-ए- इश्क करते हैं तुमसे।
रूह से रूह ने मिलके सीखा देह का हर एक दाग़ छुपाना...! रूह से रूह ने मिलके सीखा देह का हर एक दाग़ छुपाना...!
एक कविता - : 'सबसे भूखा आदमी' एक कविता - : 'सबसे भूखा आदमी'
मोहब्बत नाम हटा देना इतिहास -भविष्य के ख्यालों से, मन के भावों से, जान प्यारी है तो मोहब्बत नाम हटा देना इतिहास -भविष्य के ख्यालों से, मन के भावों से, जान प्यार...
इक चूनर है जिसपर उसने खुद टांके थे चांद सितारे आज किसी ने पूछा मुझसे क्या रखा है पास इक चूनर है जिसपर उसने खुद टांके थे चांद सितारे आज किसी ने पूछा मुझसे क्या रखा...
जिस की आवाजें पल पल तुम्हें जगा देती, वह हमसफ़र यार तेरा सिर्फ मैं हूं जिस की आवाजें पल पल तुम्हें जगा देती, वह हमसफ़र यार तेरा सिर्फ मैं हूं
मेरा सपना ही तो बस मेरा अपना था। मेरी ही तरह वो इस बार भी टूट गया। मेरा सपना ही तो बस मेरा अपना था। मेरी ही तरह वो इस बार भी टूट गया।
मैं भी शायद गलत वक्त पर गुलाब था ले आया वो बेहद शर्मा गई थी उसे कोई अच्छा बहाना ना मैं भी शायद गलत वक्त पर गुलाब था ले आया वो बेहद शर्मा गई थी उसे कोई अच्छा ब...
कविता सिर्फ नदी की कल कल बहती धार नहीं है कविता उन आशंकित नदी के किनारों की व्यथा है कविता सिर्फ नदी की कल कल बहती धार नहीं है कविता उन आशंकित नदी के किनारो...
थोड़ा सा काम और अधिक कीजिए, सफलता की चाबी तू अपने हाथ लीजिए थोड़ा सा काम और अधिक कीजिए, सफलता की चाबी तू अपने हाथ लीजिए
मिल गयी दुनियां के झमेले में जान मिल गयी। मिल गयी दुनियां के झमेले में जान मिल गयी।
ये रवि की किरणें तुमसे जलकर टेढ़ी टेढ़ी चलने लगी हैं ये रवि की किरणें तुमसे जलकर टेढ़ी टेढ़ी चलने लगी हैं
महानगर में हाउसवाइफ महानगर में हाउसवाइफ
सबके लिए खास-खास बनें यहां, बस तुम अपनी पहचान ले बंदे। सबके लिए खास-खास बनें यहां, बस तुम अपनी पहचान ले बंदे।
मृत्यु का आगमन, एक निश्चित सत्य, जीवन की चरम सीमा, अन्त की यह प्रेरणा। मृत्यु का आगमन, एक निश्चित सत्य, जीवन की चरम सीमा, अन्त की यह प्रेरणा।
इसलिए वह कुछ बोलता नहीं है सिर्फ देखता रहता है, मुस्कुराता रहता है। इसलिए वह कुछ बोलता नहीं है सिर्फ देखता रहता है, मुस्कुराता रहता है।
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जिन्न ने कहा," जो हुक्म मेरे आका, इस वक्त की यही उचित मांग है।" जिन्न ने कहा," जो हुक्म मेरे आका, इस वक्त की यही उचित मांग है।"
मोहब्बत के नशे में होता जो चूर उसका दिल फिर रहता नहीं उसका मोहब्बत के नशे में होता जो चूर उसका दिल फिर रहता नहीं उसका