Kanak Agarwal
Fantasy Inspirational Others
ये कलम भी रोती है,,
फुर्सत हो तो कभी सुनना..
हंसी, खुशी, मुस्कुराहट,
प्रेम-प्रीति छोड़कर..
जब लिखते हो इससे...
झूठ, बेईमानी, चोरी, डकैती,
व्यभिचार और दुराचार
तब..
सिसकती है ये..!
पर फिर भी,
सच कहने की हिम्मत
रखती है ये....
रोशन दीवाली
प्रकृति और स्...
तस्वीर युद्ध ...
इश्क़
प्रेम
हम तो बस तेरे...
मनमर्जी
मुझ में रब बस...
झरना
जिंदगी
प्रकृति माँ की गोद में उगते है सोने के फसल प्रकृति माँ की गोद में उगते है सोने के फसल
हाथों से मुंह ढंक तू शरमाई बरसात में तेरी याद आई। हाथों से मुंह ढंक तू शरमाई बरसात में तेरी याद आई।
उदासी और एकाकी है जीवन जिंदगी है अब तेरे वास्ते उदासी और एकाकी है जीवन जिंदगी है अब तेरे वास्ते
कुछ घाव बढ़ाने वाले थे, कुछ दर्द मिटाने वाले थे। मन से मन मिलते देखे, देखे जो सपन निरा कुछ घाव बढ़ाने वाले थे, कुछ दर्द मिटाने वाले थे। मन से मन मिलते देखे, देखे जो...
कालिख मैली को धो आओ, संस्कृति पे मत दाग लगाओ। कालिख मैली को धो आओ, संस्कृति पे मत दाग लगाओ।
तभी आशाएँ सफलीभूत होंगी, तभी स्वप्न साकार होंगे। तभी आशाएँ सफलीभूत होंगी, तभी स्वप्न साकार होंगे।
भावनाओं की जो बात समझे, उसी से प्यार होता है भावनाओं की जो बात समझे, उसी से प्यार होता है
ऐसे व्यवहार को जहां में बढ़ाने के लिए, क्यों ना मानव एकता की बात करें। ऐसे व्यवहार को जहां में बढ़ाने के लिए, क्यों ना मानव एकता की बात करें।
चल चंचल मन अब चल तू चल ले चलता तुझे अँधेरों में। चल चंचल मन अब चल तू चल ले चलता तुझे अँधेरों में।
और मैं मुझको ही ढूंढ नहीं पाता हूँ... क्या मैं ही मानसूनी बारिश हूँ...? और मैं मुझको ही ढूंढ नहीं पाता हूँ... क्या मैं ही मानसूनी बारिश हूँ...?
चमक उठे व्यक्तित्व, दमकता सारा तन-मन।। चमक उठे व्यक्तित्व, दमकता सारा तन-मन।।
मैं भी आम हूँ, दर-बदर भटकता इंसान, यकी नहीं तो मेरे घर के, दीवारों से पूछ लो ! मैं भी आम हूँ, दर-बदर भटकता इंसान, यकी नहीं तो मेरे घर के, दीवारों से प...
बैठ के पास, कोई कहानी लिखूं कोई ऐसा लम्हा, मेरे नाम कर दो। बैठ के पास, कोई कहानी लिखूं कोई ऐसा लम्हा, मेरे नाम कर दो।
होंठो की हँसी हो तुम चेहरे की मुस्कान हो मेहंदी है जचती तुझसे मेरे जीवन की जान हो। होंठो की हँसी हो तुम चेहरे की मुस्कान हो मेहंदी है जचती तुझसे मेरे जीवन...
मनाने की तमन्ना हो, तो आएँ इस बेहतरीन माहौल में बनी रेस्तरां में... मनाने की तमन्ना हो, तो आएँ इस बेहतरीन माहौल में बनी रेस्तरां में...
घर से बाहर निकल के आओ दृश्य अलौकिक आनन्द पाओ, घर से बाहर निकल के आओ दृश्य अलौकिक आनन्द पाओ,
इस दिल को फिर से ,संवारना जरूरी है इस दिल को फिर से ,संवारना जरूरी है
एक तेरे सिवा प्रेम को अब कोई भी नहीं चाहिए मंजिल। एक तेरे सिवा प्रेम को अब कोई भी नहीं चाहिए मंजिल।
किसी बात का ग़म इधर भी नहीं है, मेरा अब कोई हमसफ़र भी नहीं है। किसी बात का ग़म इधर भी नहीं है, मेरा अब कोई हमसफ़र भी नहीं है।
और मेहबूब को मोहब्बत की याद दिला रही हूँ।। और मेहबूब को मोहब्बत की याद दिला रही हूँ।।