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Krishna Khatri

Tragedy

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Krishna Khatri

Tragedy

कलेजा नहीं कांपा ?

कलेजा नहीं कांपा ?

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ऐ मेरे जनक 

मैं अंश तेरा

हूं तेरा ही प्रतिरूप 

तूने मुझे जन्म दिया

पाला-पोसा 

परवान चढ़ाया 

आकार दिया 

आधार बने

दुनिया का -

हर रंग दिखाया

ऊंच-नीच से 

अवगत कराया 

फिर अपने अंश को 

किसी और के घर की

लाज बनाकर

खुद से अलग कर दिया 

क्यों , ऐसा क्यों किया ?

तेरा दिल जरा भी -

नहीं कांपा -

किसी और को 

अपने जिगर के टुकड़ा

सौंपते हुए ?

क्यों नहीं ….. ?

तू तो मेरा दिल है

मेरी खुशी

मेरा ग़म

मेरा दुख-दर्द

सबकुछ है 

मेरा हिस्सा जो है 

इसलिए ,.....

अगर तुझे चोट लगती है तो 

दर्द मुझे होता है 

तेरी आंखों के आंसू 

मेरी आंखों से बहते हैं 

तेरी खुशी 

मुझे सारे जहां की 

खुशियां देती हैं

क्या अब भी 

तुझे लगता है कि …..

मेरा कलेजा -

नहीं कांपा होगा ? 


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