STORYMIRROR

Moren river

Inspirational Others

3  

Moren river

Inspirational Others

कल से कल सँवार

कल से कल सँवार

1 min
222

कल से कल सँवार

न हो तू भीड़ में शुमार.."


कल को संवारने में तू

आज बर्बाद न कर।

हथेली की रेखाओं का

सृजन अब..स्वयं ही कर।

न जाने किस दौर में ...

ले जाए यह..जिन्दगी?

सब्र रख कल गुज़रा है, तो..

आज भी गुज़र जाएगा..

पर..कल का आज क्या है.?

जिस पर सँवार सके तू कल को !

सब्र रख, कर्म में शर्म न रख,

वक्त बदलते ही कर्म दिखता है।

कल के दायरों में तू देख ज़रा..

तेरा सँवरा हुआ कल दिखेगा..

ज़रा मुस्तैदी रख, तैयारी भी रख.

आगे चलने वालों के पीछे हमेशा..

आप ही कायनात चलते देखी है।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational