कितना आसान होता है
कितना आसान होता है
कितना आसान होता है,
किसी को भुलाना,
कुछ दिनों की दूरी,
फिर कहीं और दिल लगाना।
पहले लगता था मुझे भी,
कि मैं भुला ना सकूँगी उसे,
मगर वक़्त ने सिखा दिया,
दिल कहीं और लगाना मुझे।
ऐसा नहीं कि मैं रोई नहीं,
उसके लिए कभी भी,
मैं भी तड़पी वो भी तड़पा,
और हम दोनों का ये दिल भी धड़का।
मगर हम दोनों के बीच में,
शर्तें ही कुछ ऐसी थीं,
कि वक़्त के साथ भुला देंगे,
जब भी अपने इश्क में कमी होगी।
आज उसके पास वक़्त नहीं,
इसलिये मैंने उसे भुला दिया,
अपने वक़्त को व्यस्त बनाकर,
कहीं और दिल लगा लिया।।

