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Ravinder Raghav

Romance

4.0  

Ravinder Raghav

Romance

किसी और को क्यों देखूँ

किसी और को क्यों देखूँ

1 min
251


किसी और को क्यों देखूँ 

तुम्हें देखने के बाद

मक्खन सी तेरी काया

शहद सी टपकती आंखें

गुलाब की पंखुड़ियों से कोमल होंठ

कमल सा खिलता चेहरा

मोतियों सी मुस्कान

मोम सा पिघलता दिल

झरने से बहते बाल

नागिन सी बलखाती चाल

समुंदर से गहरा प्यार

किसी और को क्यो देखूँ 

तुम्हें देखने के बाद।



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