रूपेश श्रीवास्तव 'काफ़िर'
Tragedy Others
झोपड़े में उसके तरक्की की रौशनी नहीं जाती,
आँखों से कभी अश्कों की नमीं नहीं जाती।
भूखा सो जाता है अक्सर सबको खिलाने वाला,
जाने क्यूँ किसानों तलक आमदनी नहीं जाती।।
मोहब्बत
सच
दोस्ती
खेल पुराना चल...
किस्मत
वतन मेरा
बात नहीं होगी...
मन का दीप जला...
सलाम
ध्यान
ख्वाहिशों का ये समंदर कभी कम नहीं होता है। ख्वाहिशों का ये समंदर कभी कम नहीं होता है।
तिरस्कार के लिए पैदा हुई, बलात्कार के लिए पैदा हुई। तिरस्कार के लिए पैदा हुई, बलात्कार के लिए पैदा हुई।
फिर इस मोमबत्ती के जलाने का औचित्य क्या है ? फिर इस मोमबत्ती के जलाने का औचित्य क्या है ?
ये नौजवान कैसे, हम सोचें कैसे, संवारेंगे ये अपना हिंदुस्तान...?? ये नौजवान कैसे, हम सोचें कैसे, संवारेंगे ये अपना हिंदुस्तान...??
धरती जैसे स्वर्ग के हकदार सभी क्यों वंचित रखें इन्हें जीवन की खुशियों से धरती जैसे स्वर्ग के हकदार सभी क्यों वंचित रखें इन्हें जीवन की खुशियों से
जिसे जन्म लेते, छोड़ा मृत्युद्वार फिर से ममता हुई है, शर्मसार जिसे जन्म लेते, छोड़ा मृत्युद्वार फिर से ममता हुई है, शर्मसार
जिसके लिए, ताउम्र मरते रहे वो खूनी रिश्ते रंग बदलते रहे जिसके लिए, ताउम्र मरते रहे वो खूनी रिश्ते रंग बदलते रहे
रूह कांँप जाती है सोच कर जब भी वो डर याद आता है। रूह कांँप जाती है सोच कर जब भी वो डर याद आता है।
कब तक भारत को मिलेगी सियासी पाखंडों से मुक्ति। कब तक भारत को मिलेगी सियासी पाखंडों से मुक्ति।
ये उजले - उजले चेहरे देखो, अंदर से कितने सियाह हैं l ये उजले - उजले चेहरे देखो, अंदर से कितने सियाह हैं l
लिए थे जिस दिन तुमने सात फेरे मेरे जीवन मे घिर आये थे अंधेरे। लिए थे जिस दिन तुमने सात फेरे मेरे जीवन मे घिर आये थे अंधेरे।
आसमाँ को देख सवाल करता हूंँ, हम गरीबों को मसीहा कौन है ? आसमाँ को देख सवाल करता हूंँ, हम गरीबों को मसीहा कौन है ?
एक सवाल पूछता हूं तुमसे, तुमने क्यों मुझको ये ज़ख्म दिया। एक सवाल पूछता हूं तुमसे, तुमने क्यों मुझको ये ज़ख्म दिया।
लगभग तेरे दिल से निकल कर अब हम जाने वाले हैं। लगभग तेरे दिल से निकल कर अब हम जाने वाले हैं।
ऐसा अगर नहीं होता, ऐसा नहीं होता। फासला हम दोनों में ,ऐसा नहीं होता। ऐसा अगर नहीं होता, ऐसा नहीं होता। फासला हम दोनों में ,ऐसा नहीं होता।
मत पूछना तुम इसकी वजह, यह क्या कर रहा हूँ। मत पूछना तुम इसकी वजह, यह क्या कर रहा हूँ।
कठपुतली ही तो हूं मैं तेरे हाथों की, ऐ ज़िंदगी। कठपुतली ही तो हूं मैं तेरे हाथों की, ऐ ज़िंदगी।
आज सुबह ये जो पुरवा आई है कुछ उदास-उदास सी है। आज सुबह ये जो पुरवा आई है कुछ उदास-उदास सी है।
गरीब बेटी को निशाना बनाया जाता है, खेलते है लोग उनके जज्बातों से, गरीब बेटी को निशाना बनाया जाता है, खेलते है लोग उनके जज्बातों से,
कैसी जननी हो ? किस-किस से डर रही हो? कैसी जननी हो ? किस-किस से डर रही हो?