रूपेश श्रीवास्तव 'काफ़िर'
Tragedy Others
झोपड़े में उसके तरक्की की रौशनी नहीं जाती,
आँखों से कभी अश्कों की नमीं नहीं जाती।
भूखा सो जाता है अक्सर सबको खिलाने वाला,
जाने क्यूँ किसानों तलक आमदनी नहीं जाती।।
मोहब्बत
सच
दोस्ती
खेल पुराना चल...
किस्मत
वतन मेरा
बात नहीं होगी...
मन का दीप जला...
सलाम
ध्यान
न कोई मुझको प्रणाम करता मुझको न कोई स्मरण करता न कोई मुझको प्रणाम करता मुझको न कोई स्मरण करता
कौन कहता है कि हमें कभी रोना नहीं है आता दिल हमारा भी है भावुक,बस दिखाना नहीं है आता कौन कहता है कि हमें कभी रोना नहीं है आता दिल हमारा भी है भावुक,बस दिखाना नह...
स्वीकार कर लिया है उसने, अब नियति के आघात को। स्वीकार कर लिया है उसने, अब नियति के आघात को।
और सूने अब खेल के मैदान हो गए हैं, घर अब घर कहाँ ? सूने मकान हो गए हैं। और सूने अब खेल के मैदान हो गए हैं, घर अब घर कहाँ ? सूने मकान हो गए हैं।
कर्तव्य सिर्फ ससुराल के नहीं, सुकून आएगा जब, बेटी भी साम्ब सके बूढ़े माँ बाप को अपनी बाह कर्तव्य सिर्फ ससुराल के नहीं, सुकून आएगा जब, बेटी भी साम्ब सके बूढ़े माँ बाप क...
अब बस भी करो यार, कब तक रहोगे झूठ पर सवार ? अब बस भी करो यार, कब तक रहोगे झूठ पर सवार ?
समझ लो नया दौर आएगा, बाकी और कुछ नहीं। समझ लो नया दौर आएगा, बाकी और कुछ नहीं।
कैसे रोऊँ मैं तो पुरूष हूँ न रोने का अधिकार नहीं है। कैसे रोऊँ मैं तो पुरूष हूँ न रोने का अधिकार नहीं है।
कैसी विडंबना है मेरी किस्मत में किस कारण में यहाँ आई हूँ ? कैसी विडंबना है मेरी किस्मत में किस कारण में यहाँ आई हूँ ?
नारी तेरी व्यथाओं का अंत नहीं है पर तेरी क्षमताएं भी तो अनंत है नारी तेरी व्यथाओं का अंत नहीं है पर तेरी क्षमताएं भी तो अनंत है
अगन लगी हुई है,मेरे इस हृदय के बहुत भीतर। अगन लगी हुई है,मेरे इस हृदय के बहुत भीतर।
यह मन के जुगनू हमें कभी अस्त व्यस्त तो कभी मस्त मस्त रखते हैं। यह मन के जुगनू हमें कभी अस्त व्यस्त तो कभी मस्त मस्त रखते हैं।
हंसना तुम्हें यूं आया कैसे, लाज का पर्दा उठाया कैसे! हंसना तुम्हें यूं आया कैसे, लाज का पर्दा उठाया कैसे!
नाराज हूँ...!! उन तमाम बच्चों से जो फ्रस्ट्रेशन में आकर खो देते हैं अपना जीवन। नाराज हूँ...!! उन तमाम बच्चों से जो फ्रस्ट्रेशन में आकर खो देते हैं अप...
अमीरों की जो नीति है उसकी नींव ही फरेब है सिर्फ इसी कारण से तो गरीबों की फटी जेब है। अमीरों की जो नीति है उसकी नींव ही फरेब है सिर्फ इसी कारण से तो गरीबों की फटी ...
हजार नाकामिया मिली हो, पर लाख अनुभव के साथ ज़िन्दगी को मज़े से जीते, मैंने देखा है। हजार नाकामिया मिली हो, पर लाख अनुभव के साथ ज़िन्दगी को मज़े से जीते, मैंने देखा है...
पुस्तकों में जो कुछ वर्णन पढ़ा था उससे भी भीषणतम क्रूर कलियुग है। पुस्तकों में जो कुछ वर्णन पढ़ा था उससे भी भीषणतम क्रूर कलियुग है।
मैं पानी हूँ। गर्भ से निकला, कुछ मीठा हुआ हूँ। मैं पानी हूँ। गर्भ से निकला, कुछ मीठा हुआ हूँ।
स्त्री चरित्र को बदनाम करता है उसे समाज में कुलटा कह कर हिकारत की नजरों से देखता है स्त्री चरित्र को बदनाम करता है उसे समाज में कुलटा कह कर हिकारत की नजरों से द...
टेलीविजन पर यह प्रसारण नहीं हुआ अख़बारों पर भी यह लिखा नहीं गया जंगल इलाके की। . टेलीविजन पर यह प्रसारण नहीं हुआ अख़बारों पर भी यह लिखा नहीं गया ज...