sneh lata
Tragedy
सरहद पर सैनिक मरें, घर में मरें किसान।
जनसेवक बेशर्म बन,सोते चादर तान।।
सोते चादर तान, इन्ही के घर हैं भरते।
फिर इनको क्या पड़ी,रात- दिन निर्धन मरते।
निज सुत कर कुर्बान, अकिंचन होते गदगद।
पता चले जब पुत्र ,लड़ें नेता के सरहद।। ।
मैं एक नारी ह...
'पाखंड'
नारी
'स्त्री"
"पर्यावरण एवं...
'किसान'
न जाने क्यों मिलने पर हमारे ऐतराज़ था बहुत ज़माने को शामिल हो गए सारे एक तरफ और रौंद डाला प्या... न जाने क्यों मिलने पर हमारे ऐतराज़ था बहुत ज़माने को शामिल हो गए सारे एक तरफ...
कुछ टूट रहा था, कुछ छूट रहा था, लेखन से नाता टूट रहा था। कुछ टूट रहा था, कुछ छूट रहा था, लेखन से नाता टूट रहा था।
मेरी चीखों से तुम्हें सुख मिलता है ऐसा तुम कहते हो मेरी चीखों से तुम्हें सुख मिलता है ऐसा तुम कहते हो
मैं तो एक वैश्या हूं, और वैश्या ही कहलाऊंगी जिस्म बेचकर ही, खुद को जिन्दा रख पाऊंगी। मैं तो एक वैश्या हूं, और वैश्या ही कहलाऊंगी जिस्म बेचकर ही, खुद को जिन्दा रख ...
अपना पट शीघ्र न खोलूँगी कुछ मुझको तो मनाये वो अपना पट शीघ्र न खोलूँगी कुछ मुझको तो मनाये वो
गज़ब गज़ब की बातें सुनी है उन्ही बातों में एक खास बात सुनी। गज़ब गज़ब की बातें सुनी है उन्ही बातों में एक खास बात सुनी।
नौजवान गुमराह हो रहे । दूसरों के इशारों पर अपनों को ही लूट रहे । नौजवान गुमराह हो रहे । दूसरों के इशारों पर अपनों को ही लूट रहे ।
मेरे जैसा कहा मिलेगा तुम मुझसे यह कहते थे अब के है जो साथ तुम्हारे, तुम ही बताओ कैसा है मेरे जैसा कहा मिलेगा तुम मुझसे यह कहते थे अब के है जो साथ तुम्हारे, तुम ही बताओ...
'जीवधारी देश', ख़ुद को मानते हैं राज, सत्ता सब बदलना चाहते हैं। 'जीवधारी देश', ख़ुद को मानते हैं राज, सत्ता सब बदलना चाहते हैं।
अगन लगी हुई है,मेरे इस हृदय के बहुत भीतर। अगन लगी हुई है,मेरे इस हृदय के बहुत भीतर।
दूर कहीं दिख रहा था एक अस्थि पिंजर, जिस पर रह गया था बस मॉंस चिपक कर। दूर कहीं दिख रहा था एक अस्थि पिंजर, जिस पर रह गया था बस मॉंस चिपक कर।
मम्मी मैं क्या सच मे मर गई हूं जो आप लोग मेरे सारे कपड़े खुशी को देने चले गए थे ? मम्मी मैं क्या सच मे मर गई हूं जो आप लोग मेरे सारे कपड़े खुशी को देने चले गए थे ?
यह मन के जुगनू हमें कभी अस्त व्यस्त तो कभी मस्त मस्त रखते हैं। यह मन के जुगनू हमें कभी अस्त व्यस्त तो कभी मस्त मस्त रखते हैं।
माँ ने अपनी कृपा प्रसाद से मुझे भरपूर अभिभूत कर दिया। माँ ने अपनी कृपा प्रसाद से मुझे भरपूर अभिभूत कर दिया।
मेरे हिंदू मुस्लिम बच्चों को आपस में लड़ाया जाता है मेरे हिंदू मुस्लिम बच्चों को आपस में लड़ाया जाता है
नाराज हूँ...!! उन तमाम बच्चों से जो फ्रस्ट्रेशन में आकर खो देते हैं अपना जीवन। नाराज हूँ...!! उन तमाम बच्चों से जो फ्रस्ट्रेशन में आकर खो देते हैं अप...
क्या खूब लिखा है कवी ने प्यार, इश्क, मोहब्बत और जज्बात के बारे में... लेकिन एक कसक सी उठती ही है सीन... क्या खूब लिखा है कवी ने प्यार, इश्क, मोहब्बत और जज्बात के बारे में... लेकिन एक क...
शिकायत थी उनकी कि हम उन्हें मिलते नहीं। तो बन के खुशबू उनके बदन की महका जाये। शिकायत थी उनकी कि हम उन्हें मिलते नहीं। तो बन के खुशबू उनके बदन की महका जाये।
पुस्तकों में जो कुछ वर्णन पढ़ा था उससे भी भीषणतम क्रूर कलियुग है। पुस्तकों में जो कुछ वर्णन पढ़ा था उससे भी भीषणतम क्रूर कलियुग है।
कौन देश के वासी तुम बादल चले कहाँ होकर तैयार ? कौन देश के वासी तुम बादल चले कहाँ होकर तैयार ?