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sneh lata

Tragedy


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sneh lata

Tragedy


'किसान'

'किसान'

1 min 180 1 min 180

सरहद पर सैनिक मरें, घर में मरें किसान।

जनसेवक बेशर्म बन,सोते चादर तान।।

सोते चादर तान, इन्ही के घर हैं भरते। 

फिर इनको क्या पड़ी,रात- दिन निर्धन मरते। 

निज सुत कर कुर्बान, अकिंचन होते गदगद। 

पता चले जब पुत्र ,लड़ें नेता के सरहद।। ।


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