ख्याल
ख्याल
सब लोगों के बीच
एक तेरी कमी थी
यूंँ तो हम खुश थे
बस आँखों में नमी थी
क्यों सबके पास होने पर भी
खुद से दूर थे ?
चाहिए था तेरा साथ बस
मगर तुझसे भी दूर थे
कुछ समझ में न आया
ये खुली हवा की हद कहाँ तक है ?
बस तू ही दिखता साथ मेरे
जाती ये नज़र जहाँ तक है
कुछ ख्याल मेरे उलझे थे
तुझे बस याद ही किया
जाना, कि सब सुलझे थे..
ज़िम्मेदारी के बोझ तले दबे
तू इस मासूम दिल की राहत है
खुदा ने जो सच्चे मन से पूरी की
बस तू वो चाहत है।

