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S Ram Verma

Abstract

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S Ram Verma

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ख्वाब !

ख्वाब !

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मैं प्राय: हर रात 

ही जन्म लेता हूँ..

लेकिन हर सुबह..

मेरी हत्या कर दी जाती है..


पर सुनो मैं रक्तबीज हूं..

मुझे जन्म देना तुम्हारा 

धर्म भी है और कर्तव्य भी है..


क्योंकि मैं तुम्हारी ही तो

अंतरात्मा में पलता

वो अधूरा ख़्वाब हूँ..!


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