STORYMIRROR

pariy♥ y👻

Abstract

4  

pariy♥ y👻

Abstract

ख्वाब

ख्वाब

1 min
199

लफ्ज जहाँ अल्फाजो़ं से सिमट जाते हैं

रस्ते रहबर राहें जिधर मचल जाते हैं

शायरों की अंदाज़ सी, शायरी जहाँ पहल करती है

मंज़िल हमारी वहीं है, ज़हन जहाँ टहल करती है।


बस इतनी होगी दुआ, की हर पल अपना सा लगता हो

मंज़िल खुद की चुनना, ज़रा सपना सा लगता है

ना हुस्न की चाह, ना अदा ना नज़ाकत

चाहत है इतनी, की अपना अकल कयामत सा लगता हो।


चमकेंगे एक दिन, बन के सितारा

सब के दिलों में, अरमान ये है

चाहत है अपना, सूरज बनेंगे

मंज़िल जहाँ भी है, इबादत है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract