STORYMIRROR

PANKAJKUMAR THOMBARE

Tragedy

3  

PANKAJKUMAR THOMBARE

Tragedy

ख्वाब

ख्वाब

1 min
191


जिंदगी ख्वाब थी देखता ही रहा 

मौत के सामने सोचता ही रहा 


लोग मेरे गये छोड के सब मुझे

ख्वाब में आपको ढुंढता ही रहा 


आज मै कौन हूं हां मुझे है पता

आपकी नजर में लापता ही रहा 


खेल ही खेलमे खत्म सब हो गया 

समझकर जीत मै खेलता ही रहा 


बिखरकर बिखरकर आसमां रो गया

कौम बारिश उसे समझता ही रहा।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy