STORYMIRROR

PANKAJKUMAR THOMBARE

Romance

4  

PANKAJKUMAR THOMBARE

Romance

मोहब्बत हो गई है

मोहब्बत हो गई है

1 min
361

सनम मेरी अमानत हो गई है

तिरी चाहत इबादत हो गई है

मुझे हर फैसला मंज़ूर तेरा

ज़ुबाॅं तेरी अदालत हो गई है


सहारा ढुंढता हुॅं मै तुम्हारा

तुम्हें पाना ही मन्नत हो गई है


बहारें लौट आयी है जहाॅं में

तिरी मुस्क़ान जन्नत हो गई है


छुपाकर क्या करोगे तुम कहानी

बताओ ना मुहब्बत हो गई है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance