खुद की कद्र कर ज़रा तू
खुद की कद्र कर ज़रा तू
दुनिया भले ही करे ना करे, समाज तुझे समझे ना समझे,
खुद को सबसे पहले समझ तू, थोड़ी ही सही पर खुद की कद्र कर ज़रा तू
मत भूल पूरी दुनिया ने चश्मा एक धारण कर रखा है,
सब तुझे उसी चश्मे से देखते और भाँपते हैं जिस से तू खुद को देखता है।
इसलिए कदम-कदम पर बिखरी चुनौतियों का बहदुरी से डट कर मुकाबला कर तू,
खुद पे भरोसा रखते हुए आगे और बस आगे कदम बढ़ाता चला जा तू।
तेरी सोच तेरे व्यक्तित्व का प्रतिबिंब है, उसे कभी भी झुकने ना दे तू,
उत्तम विचार होंगे अगर तेरे, तो स्वयं भी उत्तम बन जाएगा तू।
सबके नज़रिये से पहले खुद के बारे में अपने नज़रिये को प्राथमिकता दे तू,
सब तुझे वैसा ही समझेंगे जैसा खुद को समझेगा तू।
संघर्ष तो माँ के गर्भ से शुरू होकर जीवन पर्यंत चलता है,संघर्ष से कभी ना घबरा तू,
ये संसार एक जंग-ए -मैदान है,हर पल, हर दम डटा रह तू।
नाकारात्मक हुआ तेरा नज़रिया, याद रख ! जग भी वैसा ही हो जाएगा,
जितनी तुझे नज़र ना आएंगी,उस से कहीं अधिक खामियाँ जग तुझ में निकाल जाएगा।
कहते हैं सृष्टि में सकारात्मक-नाकारत्मक ऊर्जा विराजमान हैं,
सोच होगी जैसी तेरी, उसी तरह की ऊर्जा खिंची चली आएगी तेरी ओर,
संसार को तभी समझ पाएगा जब खुद को समझ जाएगा तू,
इसलिए भरोसा खुद पे रख सदा तू, खुद की कद्र कर ज़रा तू।
