खोजी
खोजी
खोजी
खोजी खोज रहा भगवान को
जो भी मिलता, पूछे उसको
क्या तूने भगवान को देखा
देखने में कैसे दिखते वो ।
बहुत प्रसिद्ध हो गया वो खोजी
“ नामी खोजी है” लोग कहते थे
बस ईश्वर के ही परायण
अपना सब कुछ लगा दिया इसीमें ।
खोजते खोजते उमर बीत गई
पर भगवान का पता मिला ना
एक दिन पहुँचा दूर गाँव में
सिद्ध संत एक रहते थे वहाँ ।
जब उनसे भी प्रश्न किया यही
प्रभु का पता मालूम है क्या
संत बोले “ हाँ “ , मिल चुका मैं
क्या तू भी उनसे मिलना चाहता ।
बता दिया पता भगवान का
प्रसन्नता मुख पर थी खोजी के
सोचे कि मेहनत सफल हो गई
सरपट भागा भगवान से मिलने ।
पहुँच गया वो गंतव्य पर
मंजिल जो ढूँढ रहा था कब से
दस्तक दरवाज़े पर देने को
सोचे, तभी आया उसके मन में ।
भगवान को मैंने पा ही लिया
परंतु इसके बाद अब और क्या
मैं तो सदा से एक खोजी हूँ
बस यही अस्तित्व मेरा ।
जो भगवान से मिल लूँगा मैं
ख़त्म हो जाए अस्तित्व ये
धड़कन उसकी बड़ी तेज हुई
जल्दी से भागा वो वहाँ से ।
खोजी खोजी ही रहना चाहता
और खोज कर रहा जिसकी वो
वो अगर मिल भी जाए उसे
हो सकता वो ले ना उसको ।
खोज करे अब भी भगवान की
ना जाने इधर उधर कहाँ, कहाँ
पर जहाँ भगवान हैं रहते
भूल से भी ना जाए वो वहाँ ।
