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Ajay Singla

Inspirational

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Ajay Singla

Inspirational

आख़िरी बार

आख़िरी बार

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आखिरी बार 


आख़िरी बार देखोगे सूर्य को 

एक दिन ऐसा आएगा कभी 

चंद्रमा और तारे आकाश में 

आख़िरी बार तुम देखोगे सभी ।


अपने पसंद का भोजन भी 

आख़िरी बार करोगे तुम एक दिन 

किसी प्रिय व्यक्ति के पास तुम 

आख़िरी बार बैठोगे पल छिन्न ।


आख़िरी बार हँसोगे किसी बात पे 

एक दिन ऐसा भी आयेगा 

काल जो बैठा सर पर तेरे 

सब बहा के ले जाएगा ।


आख़िरी बार देखोगे घर को 

पर तुम्हें पता नहीं होगा ये 

कि ये मेरा आख़िरी बार है 

चल दोगे तुम इस संसार से ।


याद में जो रोयेंगे तेरी 

वो भी चल देंगे ऐसे ही 

“ लोग क्या कहेंगे” सोचो जो 

उन सबकी भी यही है गति ।


जो जीवन मैं जी रहा हूँ 

क्या वो जीवन ही सही है 

उत्तर हाँ है तो ठीक सब 

अगर ना है तो क्या कमी है ।


क्या जीने की दिशा ग़लत है 

तो सोचना होगा फिर तुमको 

इस दिशा में मंजिल ना मेरी 

तुम उस दिशा को ही बदल दो ।


अजय सिंगला


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