STORYMIRROR

Ajay Singla

Inspirational

4  

Ajay Singla

Inspirational

दुःख और सुख

दुःख और सुख

1 min
1

दुख और सुख 


ढूँढ रहा कारण मैं दुख का 

ऊपर से कुछ समझ ना आए 

घर में सब सुविधा, विलास हैं 

फिर भी दुख मुझे घेरता जाए ।


सोचूँ किस कारण दुखी हूँ 

कोई भी तो कमी नहीं है 

सब कुछ तो मिल गया जो चाहा 

फिर अशांति मन में क्यों है ।


“ जगत दुख़ाल्यम “ कहें मुनि ज्ञानीं 

सुख संसार में है नही कहीं 

मिलता सुख धन में जो सोचो 

परंतु धनी भी तो सुखी नहीं ।


मानो जो सुंदर स्त्री सुख देती 

पर वह स्त्री जिस के पास है 

वो भी तो सुख ढूँढ रहा है 

फिर सुख का कहाँपर वास है ।


पद पाकर सुख मिलेगा मुझको 

ऐसा भी मैंने सोचा था 

राजा, मंत्री देखें हैं मैंने 

दुख नहीं देखा जाता जिनका ।


करें आचरण दुख मिलता जिनसे 

करते अभिलाषा फिर सुख की 

पाप कर्म कर रहे हैं हर पल 

चाहें कि आँच लगे ना दुख की ।


अंत में निष्कर्ष ये निकला 

सुख दुख तो जुड़े एक दूजे से 

दुख जाता, सुख मिलता है तब 

जब सुख की लालसा छोड़ दें ।


अजय सिंगला


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational