STORYMIRROR

Ajay Singla

Inspirational

4.5  

Ajay Singla

Inspirational

सुंदर

सुंदर

2 mins
1

सुंदर 


जीवन में सुन्दरता क्या है 

मन में एक ये प्रश्न था आया 

क्या हृदय के अंदर का भाव ये 

या बस बाहरी देह और काया ।


चर अचर जीवों में सभी 

भासती ये सुंदरता कैसे 

सुंदर लगे पर्वत की चोटी 

पशु, पक्षी भी सुंदर वैसे ।


सुंदरता पर ये सथाई नहीं 

आज जो सुंदर, कल करूप है 

समय के साथ जो बदल रहा है 

सुन्दर ना उसका सरूप है ।


अपनी और मिष्ठान है खींचे

कुछ दिन पर जब पड़े रहें वो 

दुर्गंध उनसे आने लगती है 

कोई भी ना खा सकता उनको ।


और शुरू में ही खा लें उसे 

उदर उसे है मल बनाए 

और जो उल्टी हो जाए तो 

आँखों से भी ना देखी जाए ।


वस्तु तो वही है परंतु 

कभी सुंदर और कभी असुंदर 

गुण, रूप स्थाई ना जिसके 

वो वस्तु कैसे फिर सुंदर ।


तीस साल पहले जो मैं था 

और अब जब पचपन का हो गया 

क्या पहले सुन्दर था या अब 

इसका निर्णय कौन करेगा ।


अंदर से अब भी वही हूँ 

अपने को कुरूप ना मानूँ 

सफेद बाल, मुरझाई काया 

त्वचा के तुच्छ विकार मैं जानूँ ।


सुंदरता क्या आयु से है 

या ये रंग रूप से हो रही 

मेरी बेटी और बेटा मेरा 

माँ माने सबसे सुंदर वही ।


गोरा रंग किसी को भाए 

साँवला सुंदर लगे किसी को 

सुंदरता की परिभाषा एक ना 

एक कसौटी लगे ना इसको ।


प्रभु की कठिन तपस्या करके 

लाखों मुनि कुरूप हो गए 

जब भगवान का दर्शन पाया 

प्रभु का ही स्वरूप हो गए ।


वस्तु जो भगवान को लग गई 

बने सुंदर प्रसाद प्रभु का 

बुद्धि जुड़ी हुई जो प्रभु से 

सुंदरता में ना सानी कोई उसका ।


संसार में सुंदरता ना स्थाई 

 सुंदरता असत्य है वो तो 

सुंदर तो बस एक प्रभु हैं 

सदा सर्वदा सुंदर ही रहें वो ।


अजय सिंगला


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational