STORYMIRROR

Alka Soni

Inspirational

3  

Alka Soni

Inspirational

चाह तेरी

चाह तेरी

1 min
228

अब न रही मुझको

चाह तेरी

कब तक तकुंगी

राह तेरी


थक गई आंखे भी

अब ये मेरी

स्नेहिल हृदय को तोड़ना,

होता बड़ा सरल।


अब न पियूंगी,

कोई गरल

ढूंढ लूंगी नई 

पहचान मेरी


मीले चाहे कितनी

रातें अंधेरी

निकलूंगी बनकर

नया सवेरा

है स्वयं से

एक वचन मेरा।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational