Alka Soni
Inspirational Others
मौन रहकर
अंतर में
लहू को एक
उबाल दे
भय दिखाती हो
अगर मृत्यु तो
भुजबल से
उसको
टाल दे
सुनाई देती हो
हाहाकार तो
जूझ कर तू
कदमों को
मिलाकर ताल दे
बधिरों से भरी
सभा में
ऊंची कर
आवाज़ तू
मरघटों की शांति में
एक बवाल दे।
बेरोजगार
राखी
शहर
ये कविताएं
मरघटों की शां...
अंतहीन प्रतीक...
अनोखा देश यह ...
फ़टी जेब
मानो या न मान...
* बौनी उड़ान *
अमर रहेगी गोरा बादल की कहानी बोल रही मिट्टी राजस्थानी अमर रहेगी गोरा बादल की कहानी बोल रही मिट्टी राजस्थानी
मातृशक्ति नारीशक्ति का नमन वंदन कीजिए औपचारिकताओं भरा न अभिनंदन कीजिए। मातृशक्ति नारीशक्ति का नमन वंदन कीजिए औपचारिकताओं भरा न अभिनंदन कीजिए।
हम सबकी सुनेंगे... लेकिन हमें कोई नहीं.... कोई नहीं सुन सकता। हम सबकी सुनेंगे... लेकिन हमें कोई नहीं.... कोई नहीं सुन सकता।
सांस ये जब तक बाकी है, सब कर्म रहूँ में यूँही करती। सांस ये जब तक बाकी है, सब कर्म रहूँ में यूँही करती।
उसकी फ़ितरत इंसानों से अलग है, वो आख़िरी साँस तक साथ निभाऐगी।हाँ सच ही तो, याद ही तो मेरी जागीर है।.... उसकी फ़ितरत इंसानों से अलग है, वो आख़िरी साँस तक साथ निभाऐगी।हाँ सच ही तो, याद ह...
क्यों डरते है इस हार से हम , ये हार असल में जीना है। क्यों डरते है इस हार से हम , ये हार असल में जीना है।
पूत है कुल का गौरव तो, बेटी है संसार।।30 पूत है कुल का गौरव तो, बेटी है संसार।।30
वो राधा है वो गीता है वो शक्ति है वो सीता है. वो राधा है वो गीता है वो शक्ति है वो सीता है.
नारी इस जग की जननी है वन्दन उसको हम करते हैं।। नारी इस जग की जननी है वन्दन उसको हम करते हैं।।
हाँ हम भी होली मनाते हैं.. रिश्तों को रिश्तों से मिलाते हैं.. हाँ हम भी होली मनाते हैं.. रिश्तों को रिश्तों से मिलाते हैं..
पुनर्जन्म से पहले आत्मा करती है थोड़ा आराम! पुनर्जन्म से पहले आत्मा करती है थोड़ा आराम!
क्यों न उडूं मैं क्यों न ख्वाब देखूं मैं भला, जीने का मुझे भी अधिकार है। क्यों न उडूं मैं क्यों न ख्वाब देखूं मैं भला, जीने का मुझे भी अधिकार है।
अपने आसपास स्वच्छता लाएं, प्रदूषण रहित उमंग भरा उल्लास मनायें. अपने आसपास स्वच्छता लाएं, प्रदूषण रहित उमंग भरा उल्लास मनायें.
तुम भी जागो... जागो, अपनी संस्कृति को अपनाओ तुम। तुम भी जागो... जागो, अपनी संस्कृति को अपनाओ तुम।
नमन तुम्हे है हे! माता, मै शत शत बार प्रणाम करूॅ॑। शब्द नहीं मेरे मन मंदिर में। नमन तुम्हे है हे! माता, मै शत शत बार प्रणाम करूॅ॑। शब्द नहीं मेरे मन मंदिर मे...
मन निर्मल, पावन विचार हो और मधुर व्यवहार करो। मन निर्मल, पावन विचार हो और मधुर व्यवहार करो।
कमल हमेशा खिलता है कीचड़ और पानी में। कमल हमेशा खिलता है कीचड़ और पानी में।
क्यूं मैं माधवी की तरह न्याय, धर्म और संस्कृति के मकड़जाल में फंस कर रह जाती हूं, क्यूं मैं माधवी की तरह न्याय, धर्म और संस्कृति के मकड़जाल में फंस कर रह जाती हूं...
जल से जुड़ी, अनगिनत किस्से । पहला पन्ना, जल का उदय, सूर्य की मुस्कान, समुद्र का प्रिय। जल से जुड़ी, अनगिनत किस्से । पहला पन्ना, जल का उदय, सूर्य की मुस्कान, समुद...
रेत के समान है वक्त बंद मुट्ठी से भी फिसल जाता है, जो वक्त के साथ चले वक्त उसी के साथ। रेत के समान है वक्त बंद मुट्ठी से भी फिसल जाता है, जो वक्त के साथ चले वक्त उस...