अध्यात्म
अध्यात्म
अध्यात्म
अध्यात्म इतना जटिल है
बुद्धि से समझ ना आए
जो बात अभी सत्य है
क्षण में वो झूठी हो जाए ।
अभी कहा कि जगत असत् है
सत् तो बस भगवान ही एक है
पर फिर कहें जगत भगवान ही
पल पल उलझता जाता हूँ मैं ।
अध्यात्म सिखाए पाप ना करो
पुण्य करो जाओ स्वर्ग में
फिर कहे पुण्यात्मा, पापी सब
अंश दोनों ही परमात्मा के ।
तो फिर क्या पाप क्या पुण्य
पापी, पुण्यात्मा एक से
सब कुछ जब भगवान ही हैं तो
वही व्याप्त हैं हम सब में ।
बुद्धि इस सब को समझ ना सके
तो क्या सब बुद्धि के पार है
अध्यात्म एक उलझी पहेली
कैसे फिर समझूँ इसको मैं ।
सिद्ध कहें कि इतना सरल ये
बस तुम प्रभु शरणागत हो जाओ
ज्ञान दें वो, बुद्धि प्रवीण हो
समझ में आ जाए सब तुमको ।
