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Ajay Singla

Classics

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Ajay Singla

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अध्यात्म

अध्यात्म

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अध्यात्म 


अध्यात्म इतना जटिल है 

बुद्धि से समझ ना आए 

जो बात अभी सत्य है 

क्षण में वो झूठी हो जाए ।


अभी कहा कि जगत असत् है 

सत् तो बस भगवान ही एक है 

पर फिर कहें जगत भगवान ही 

पल पल उलझता जाता हूँ मैं ।


अध्यात्म सिखाए पाप ना करो 

पुण्य करो जाओ स्वर्ग में 

फिर कहे पुण्यात्मा, पापी सब 

अंश दोनों ही परमात्मा के ।


तो फिर क्या पाप क्या पुण्य 

पापी, पुण्यात्मा एक से 

सब कुछ जब भगवान ही हैं तो 

वही व्याप्त हैं हम सब में ।


बुद्धि इस सब को समझ  ना सके 

तो क्या सब बुद्धि के पार है 

अध्यात्म एक उलझी पहेली 

कैसे फिर समझूँ इसको मैं ।


सिद्ध कहें कि इतना सरल ये 

बस तुम प्रभु शरणागत हो जाओ 

ज्ञान दें वो, बुद्धि प्रवीण हो 

समझ में आ जाए सब तुमको ।


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