कहने को वो शख्स
कहने को वो शख्स
कहने को वो शख्स मेरा है पर मेरा नहीं होता
कैसा दरख़्त हूँ मैं जहाँ चिड़िया का बसेरा नहीं होता
बहुत चुभती है मुझे मेरी तनहाई रातों में
मगर करें तो करें भी क्या रातों में सवेरा नहीं होता
बहुत बददुआएं देते हैं उसे उसके पुराने आशिक
मर जाती वो अगर मेरी दुआओं ने उसे घेरा नहीं होता।

