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chetan prajapat

Abstract

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chetan prajapat

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एक खास काम करता हूं

एक खास काम करता हूं

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एक खास काम करता हूं मैं तुम्हें याद करता हूं

यूँ ही ख्यालो मे तुम्हारे वक्त अपना बर्बाद करता हूं


मुझे मालूम है ए-जाने वाले तुम जाकर ही मानोगे

मग़र मैं पागल फिर भी रुक जाने की फ़रियाद करता हूं


बाते तुम्हारी कोई प्यारी गज़ल जैसी लगती है

लिहाज़ा कहने के बाद वाह वाह पहले इर्शाद करता हूं


एक खूबसूरत ख्वाब देख रहा हूँ,बीती कई रातों से मैं

चुनने को झूम के साड़ी वास्ते ,मैं तुम्हारी इमदाद करता हूं


बिना कोई ख़ास कारण तुम मुझे सीने से नहीं लगाती हो ना

यहि वज़ह है के समय दर समय मैं आंसू इजाद करता हूं।


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