shekhar kharadi
Romance Others
तेरे जाने से
ये हृदय वैसे भी
खंडहर बन गया
ना कोई आता है
ना कोई जाता है
तेरी स्मृतियों के सिवा
यहां सब खाली है
बस रक्त को निचोड़े
विरह व्यथा का बोझ
मन को कुरेदता हुआ ।
ममतामय स्नेह
धनुषाकार वर्ण...
वर्ण पिरामिड ...
शाश्वत नश्वर
प्रेम का स्पर...
क्षणिका
कटीं हुई पतंग
तांका लघु काव...
मोर्डन शहर
द्रौपदी मुर्म...
वादों पर खरा उतरा हूं, क्यों नाराज हो मुझसे? वादों पर खरा उतरा हूं, क्यों नाराज हो मुझसे?
जा सनम आज से हमने तुम्हें मनाना छोड़ दिया। जा सनम आज से हमने तुम्हें मनाना छोड़ दिया।
ऊँगली में ऊँगलियों को जोड़े चलो ना बिना वजह शून्य में। ऊँगली में ऊँगलियों को जोड़े चलो ना बिना वजह शून्य में।
गुंजन है भँवरों की शब्दों की शहनाई है तन्हा है दिल मेरा तन्हा यह तन्हाई है। गुंजन है भँवरों की शब्दों की शहनाई है तन्हा है दिल मेरा तन्हा यह तन्हाई...
कोई शिकवा कोई शिकायत नहीं की तुझसे, तेरे इंतजार में आँसू भी अपने छिपाये जग से, कोई शिकवा कोई शिकायत नहीं की तुझसे, तेरे इंतजार में आँसू भी अपने छिपाये जग से...
आगे बढ़ें करूँ सामना हौसले से या आँधी के पहले ही डर जाएँ! आगे बढ़ें करूँ सामना हौसले से या आँधी के पहले ही डर जाएँ!
मैं हो भी जाती हूँ शिथिल कभी-कभी, पर उनकी स्फूर्ति बिछा देती है! मैं हो भी जाती हूँ शिथिल कभी-कभी, पर उनकी स्फूर्ति बिछा देती है!
बस तुम, बस तुम, भी कहना मान लो मेरा। बस तुम, बस तुम, भी कहना मान लो मेरा।
अनंत गगन को छूने की, चाहत ले उड़ता पंछी सा मन, अनंत गगन को छूने की, चाहत ले उड़ता पंछी सा मन,
बाँहों के बंधन में मचल उठती थी ज़िन्दगी, बिन हमसफ़र अधूरी है ज़िन्दगी, बाँहों के बंधन में मचल उठती थी ज़िन्दगी, बिन हमसफ़र अधूरी है ज़िन्दगी,
बन के आंसू इन आँखों में तुम अक्सर चली आती हो, तुम " कभी कभी यूं ही" याद आ जाती हो बन के आंसू इन आँखों में तुम अक्सर चली आती हो, तुम " कभी कभी यूं ही" याद आ जा...
,मैं तुम्हारे होने का आभास लिखा करती थी। ,मैं तुम्हारे होने का आभास लिखा करती थी।
बरसात मे साथ खाए भुट्टे के ठूँठ.. क्या गवाही दे पाएंगे मेरे प्रेम की.. बरसात मे साथ खाए भुट्टे के ठूँठ.. क्या गवाही दे पाएंगे मेरे प्रेम की..
कभी कभी लगता है रूह हूँ मैं और शरीर हो तुम! कभी कभी लगता है रूह हूँ मैं और शरीर हो तुम!
प्रेम बढ़ रहा है मेरा उसका रूह तक जो बस गया प्रेम बढ़ रहा है मेरा उसका रूह तक जो बस गया
पहले मैं प्यार में पिघल रही थी पर उसे अब अपने नफरत से जलाऊंगी। पहले मैं प्यार में पिघल रही थी पर उसे अब अपने नफरत से जलाऊंगी।
कल तक तो थे तुमसे अंजान हम , आज तुम सांसों में बसने लगे हो । कल तक तो थे तुमसे अंजान हम , आज तुम सांसों में बसने लगे हो ।
किताब के भीतर दोनों की रूह झिलमिलाती हंसती है, छंद, ताल, लय से बहती किताब के भीतर दोनों की रूह झिलमिलाती हंसती है, छंद, ताल, लय से बहती
मोहब्बत हो गई' कहने से, मोहब्बत नहीं होती. मोहब्बत हो गई' कहने से, मोहब्बत नहीं होती.
लो आती हूं मैं जीवन में, रख लेना अपनी धड़कन में। लो आती हूं मैं जीवन में, रख लेना अपनी धड़कन में।