Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!
Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!

Asmita prashant Pushpanjali

Tragedy

2  

Asmita prashant Pushpanjali

Tragedy

खंडहर।

खंडहर।

1 min
229


कोहरे ने लपेटा है शहर को

और दम घुट रहा है धुंआ में

इंसान कोई भी दिख नहीं रहा है

इंसानो के इस मेले में


दस मंजीला इमारतों के शहर में

ना जाने कहाँ खोया है आदमी।

बस घर बसे है शहरों में

और अपने खो गये है गैरो में


जज्बात रहे न यहाँ बाकी

लापता हो चुकी है इन्सानियत

खंडहरो में क्यों हुये है तब्दील

आबाद थे जो महलो में



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy