STORYMIRROR

Basudeo Agarwal

Fantasy

4  

Basudeo Agarwal

Fantasy

कहमुकरी (विविध)

कहमुकरी (विविध)

1 min
283

मीठा बोले भाव उभारे

तोड़े वादों में नभ तारे

सदा दिलासा झूठी देता

ए सखि साजन ? नहिं सखि नेता !


भेद न जो काहू से खोलूँ

इससे सब कुछ खुल के बोलूँ

उर में छवि जिसकी नित रखली

ए सखि साजन ? नहिं तुम पगली !


बारिश में हो कर मतवाला,

नाचे जैसे पी कर हाला,

गीत सुनाये वह चितचोर,

क्या सखी साजन, ना सखी मोर।


सपने में नित इसको लपकूँ

मिल जाये तो इससे चिपकूँ

मेरे ये उर वसी उर्वसी

ए सखा सजनी ? ना रे कुर्सी !


जिसके डर से तन मन काँपे

घात लगा कर वो सखी चाँपे

पूरा वह निष्ठुर उन्मादी

क्या साजन ? न आतंकवादी !


गिरगिट जैसा रंग बदलता

रार करण वो सदा मचलता

उसकी समझूँ न कारिस्तानी

क्या साजन ? नहिं पाकिस्तानी !


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Fantasy