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Basudeo Agarwal

Others

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Basudeo Agarwal

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क्षणिका

क्षणिका

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(1) क्षणिका (कैनवस)


पेड़ की पत्तियों का

सौंदर्य,

तितलियों का रंग,

उड़ते विहगों की

नोकीली चोंच की कूँची;

मेरे प्रेम के

कैनवस पर

प्रियतम का चित्र

उकेर रही है,

न जाने

कब पूरा होगा।

(2) क्षणिका (जिंदगी)


जिंदगी

चैत्र की बासन्ती-वास,

फिर ज्येष्ठ की

तपती दुपहरी,

उस पर फिर

सावन की फुहार,

तब कार्तिक की

शरद सुहानी

और अंत में

पौष सी ठंडी पड़

शाश्वत शांत।


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