STORYMIRROR

Basudeo Agarwal

Others

4  

Basudeo Agarwal

Others

क्षणिका

क्षणिका

1 min
288

(1) क्षणिका (कैनवस)


पेड़ की पत्तियों का

सौंदर्य,

तितलियों का रंग,

उड़ते विहगों की

नोकीली चोंच की कूँची;

मेरे प्रेम के

कैनवस पर

प्रियतम का चित्र

उकेर रही है,

न जाने

कब पूरा होगा।

(2) क्षणिका (जिंदगी)


जिंदगी

चैत्र की बासन्ती-वास,

फिर ज्येष्ठ की

तपती दुपहरी,

उस पर फिर

सावन की फुहार,

तब कार्तिक की

शरद सुहानी

और अंत में

पौष सी ठंडी पड़

शाश्वत शांत।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन