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Ms Ishrat Jahan Noormohammed Khan

Drama

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Ms Ishrat Jahan Noormohammed Khan

Drama

खेल

खेल

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जिंदगी खेल बन गई

धीरे धीरे जेल बन गई


हम जीना चाहते थे

पर यहां जीना जुआ

और मौत दुआ है


हर कदम पे छल है

हर बार नया दलदल है


जीना मौत के समान है

मरना एक वरदान है।


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