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Sapna K S

Tragedy

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Sapna K S

Tragedy

कहाँ सुरक्षित हूँ मैं

कहाँ सुरक्षित हूँ मैं

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कहाँ सुरक्षित हूँ

बता दो ना अब तो


माँ के कोख में रहीं

चिंता सताने लगी उसे मेरे

जीने -मरने के अस्तिव से

वो भी नारी ही हैं

फिर क्यों मार दिया उसने मुझे


बड़ी दरिंदीगी से

नौचा जाता हैं मुझे

हर मर्द तो साफ होता हैं चरित्र से

तो मेरा बलात्कार कैसे होता है


हर किताब पर आवरण होता है

फिर मुझे ही क्यो नग्न किया जाता हैं


मर्यादा में रहना मेरे सौभाग्य पर

पति के होते रावन ने अपहरण और

दुस्शासन से वस्त्रहरण क्यों हुआ


मुझपर दहलीज के सीमाएँ बाँधी

फिर कुराण में बिना नकाब रास्ते पर उतारा

और बाइबल में बच्चे का

जन्म गौशाला में क्यो हुआ


औरत हूँयहीं समस्या हूँ

समाधान नहींअब भी कह दो

जी लूँऔर मर जाऊँ


दुनिया कुछ भी कहें

मुझे गर्व हैं, मैं भी औरत हूँ।


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