ख़ामोश धड़कन
ख़ामोश धड़कन
धड़कन भी अब ख़ामोश रहती है,
किसी के आने का इंतजार करती रहती हैं।
आने से उसके बहार आती है,
लेकिन ख़ामोश धड़कन कुछ कहती हैं।
बहारों से जो तुम निखरती हो,
दिल के आईने में क्यूं आती हो?
ख़ामोश धड़कन अब धड़कनें लगती है,
हर सांस में याद तुम्हारी आती है।
-Kaushik Dave

