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मानव सिंह राणा 'सुओम'

Abstract

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मानव सिंह राणा 'सुओम'

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कदम

कदम

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कदम हर कदम कदम दर कदम

हम जब खड़े थे बाजार में

चलते रहे कदम ।


कुछ आते कदम कुछ जाते कदम

कुछ गुनगुनाते हुए बढ़ते जाते कदम

 देखकर हर कदम खुशियाँ मनाते कदम

आते जाते कदम कुछ बलखाते कदम

लड़काई में बहक जाते कदम

रोटियों पे बचपन गंवाते कदम

भीड़ बनकर शोर मचाते कदम

कदम दर कदम बढ़ जाते कदम।


दिल की आवाज बन 

दिल मे बस जाते कदम

तू चाहे न चाहे बताते कदम

वफाओं की हस्ती मिटाते कदम

गमी में भी कुछ लड़खड़ाते कदम

रोशनी में चमक आते कदम

कदम दर कदम बढ़ जाते कदम।


कुछ सहारा बने नजर आते कदम

कुछ डांट लगाते जाते कदम

बहरूपिये बने घूम जाते कदम

नंगा नाच नचाकर बलखाते कदम

भोर का इंतजार जिनको रहा

रात होते ही बहक जाते कदम।

कुछ कदम हैं हमारे तुम्हारे लिए

कदम ही हमारे बढ़ाते कदम

कदम दर कदम बढ़ जाते कदम।


सुनहरी जवानी के जाबांज ये

सोने सा नाम कमाते कदम

देश को जो माना दिलो जान तक 

शहीद होके घर तक आते कदम

नमन है हमारे सौ सौ उन्हें

चिताओं पे उनकी रुक जाते कदम

नमन है हमारा कदमों को जी

कदम दर कदम बढ़ जाते कदम।


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