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Shailendra Kumar Shukla, FRSC

Classics

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Shailendra Kumar Shukla, FRSC

Classics

कभी मिलकर तुम्हे बतायेंगे !

कभी मिलकर तुम्हे बतायेंगे !

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कब से हैं बेकरार हम 

तेरे ही इंतेजार मे हम 

चेहरा कहाँ छूपाते हो 

मसला क्यूँ बनाते हो 


सबको पता है कौन हो 

किसको पता है मौन हो 

माना कि तुम मंगरूर हो 

जाना कि नहीं दूर हो 


एक दिन वो तो आयेगा 

दिल भी साफ हो जायेगा 

तब तुम ठहर जाओगे 

मेरे ही पास आओगे 

दिल खोलकर सतायेंगे 

मिलकर तुम्हें बतायेंगे !


जो भी तुम्हारे पास है 

वो सिर्फ एक सौगात है 

बस कुछ समय की बात है 

ना दिन है य़ा ना रात है 


ऐसे चले जाओगे तुम 

कुछ भी ना रख पाओगे तुम 

उस लोक में गर तुम मिले 

मिलकर तुम्हें बतायेंगे 


कभी देख लो इस लोक में 

जो जुल्म करते ही रहे 

खोया य़ा पाया किस तरह 

कभी मिलकर तुम्हें बतायेंगे !


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