कब समझोगे
कब समझोगे
कब समझोगे तुम दिल की बात !
इंतज़ार कर कर के हार गई मैं-
हो जाएगी देर बहुत जब जागोगे
गहरी नींद से, जिसमें सपना हसीन
खोलने न दे रहा था बोझिल आंखें
जब हाथ पकड़ मेरा तुम मांग रहे थे
जीवन भर का साथ...और मेरी आंखें
कुछ बोले बिना, बहुत कुछ बोल गईं
पर न खुली आंख तुम्हारी, न आवाज़
इन्तज़ार करती ही रही उस पल का!
थक गई..
जाने कब कह पाओगे मन की बात
जाने कब तुम्हारा सपना होगा सच!
आज मैं हूं यहां -सच हूं, सपना नहीं
कल शायद सचमुच सपना बन जाऊं
कब समझोगे तुम दिल की बात!

