STORYMIRROR

Meena Mallavarapu

Romance Tragedy

4  

Meena Mallavarapu

Romance Tragedy

कब समझोगे

कब समझोगे

1 min
373

कब समझोगे तुम दिल की बात !

इंतज़ार कर कर के हार गई मैं-

हो जाएगी देर बहुत जब जागोगे

गहरी नींद से, जिसमें सपना हसीन

खोलने न दे रहा था बोझिल आंखें

जब हाथ पकड़ मेरा तुम मांग रहे थे

जीवन भर का साथ...और मेरी आंखें

कुछ बोले बिना, बहुत कुछ बोल गईं

पर न खुली आंख तुम्हारी, न आवाज़

इन्तज़ार करती ही रही उस पल का!


थक गई..

जाने कब कह पाओगे मन की बात

जाने कब तुम्हारा सपना होगा सच!

आज मैं हूं यहां -सच हूं, सपना नहीं

कल शायद सचमुच सपना बन जाऊं

कब समझोगे तुम दिल की बात!



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance