STORYMIRROR

Piyosh Ggoel

Abstract

4  

Piyosh Ggoel

Abstract

कैसी आज़ादी

कैसी आज़ादी

2 mins
360

क्या अर्थ करूँ मैं आज आज़ादी का

क्या मोल करूँ मैं भगत सिंह की फांसी का

जहाँ मातृ भाषा बोलने वाला होता शर्मसार है

मैं कैसे कह दूं की वहाँ आज़ादी का अधिकार है


जो भारत आज भी भ्रष्टाचार की जंजीरों में जकड़ा हुआ

काले धन के साँप ने जिसे कसकर पकड़ा हुआ

वो भारत क्या गुणगान करे अपनी आजादी का

जहाँ अपमान होता राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का


अपनी भाषा बोलने में जहां के लोग हिचकिचाते है

विदेशी भाषा बोलने वाले अपने ऊपर इतराते है

कोई अमल नहीं करता गांधी की बातों पर बस देते भाषण है

गुलाम तो अभी भी है देश बस अब काले गोरों का शासन है


अमीर की दौलत खा जाती गरीब के घर की इज़्ज़त को

सहन नहीं कर पाते बड़े लोग किसी गरीब की बरकत को

आज भी जहाँ पढ़ने वाले अनपढ़ों के गुलाम है

वो देश कैसे कह दे कि वो आज़ाद है


आज भी जहाँ नारी की मर्यादा पर प्रश्न चिह्न लगाया जाता है

ऊँचे कुल के जामिये को आज भी बड़ा बताया जाता है

जिस देश में आज भी जाति भेद का बोलबाला है

क्या वो देश क्रांतिकारियों के सपनों वाला है


शिक्षक भी मर्यादा भूले , भूले शिष्टाचार

आधुनिकता की दौड़ में दौड़े भूले सद व्यवहार

जहाँ राज नहीं , गुलामी करना सिखाते है

उस देश को कैसे आज़ाद बताते है


जहाँ अंधविश्वास का बंधा हुआ बंधन है

हर सड़क पर होता किसी अबला का क्रंदन है

ये कैसी आज़ादी है जहां इंसानियत को भूल गया इंसान

किसी का घर उजाड़ने के लिए रातों रात जारी हो जाता फरमान


चुप रहना ही सीखो, खामोशी का जमाना है

निर्दोषों को छोड़ो, दोषियों का जमाना है

शहीदों का अपमान होता आज़ादी के नाम पर

देश तो चलता रहेगा, भरोसा है भगवान पर


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract