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Asha Jakar

Tragedy


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Asha Jakar

Tragedy


कैसा आया रे वसंत ?

कैसा आया रे वसंत ?

1 min 190 1 min 190


कैसा आया रे वसंत ?

सखि कैसा आया रे वसन्त

जीवन का हो गया मानो अन्त ?

पेड़ - पौधे खामोश लग रहे

निर्जीव मानो जैसे सो रहे

पलाश तो ऐसे लग रहे

मानो अंगारे से दहक रहे

किस -किस का होवेगा अन्त?

सखि कैसा आया रे वसन्त ?

युद्ध की चल रही आँधियाँ

मौत की सुना रही कहानियाँ

वीरों की बता रही जवानियाँ

आन पर मर मिटी छत्राणियाँ

गूँज बलिदान की दिक.-दिगन्त

सखि कैसा आया रे वसन्त ?

वीरों ने पहना बसंती चोला

सिर पर बांधा कफन का सेहरा

तोड़ा गाँव - परिवार से नाता

रणभूमि से बस उनका नाता

सर्वत्र तूफानों का न कोई अंत

सखि कैसा आया रे वसन्त. ?

रण में युद्ध - बाजे बज रहे ,

शस्त्र ले सैनिक आगे बढ़ रहे

ऊपर बर्फीली आँधियाँ बहे

सीने पर गोलियाँ सह रहे ।

कर रहे दुश्मन से भिड़ंत ।

सखि कैसा आया रे बसंत ?


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