काश! तुम समझती
काश! तुम समझती
मेरे दिल की धड़कन की
आवाज़ को अनसुना कर
मुझे तन्हाई तोहफे में देकर
तुम चली गई
हाँ मुझे खोकर तुमने
अच्छा नहीं किया।।
मेरे मन की भाषा
समझ लेती काश तुम
मेरी आँखों से होने वाली
अश्रुपात को काश तुम समझ लेती
पर तुमने तो मेरी भावनाओं को
समझने का प्रयत्न ही नहीं किया कभी।।
मेरे मन की पुकार
समझ लेती तुम काश
मेरी अभिलाषा मेरे सपने
सब कुछ कर बर्बाद तुम चली गई
दूसरे के संग नेह लगाने
छोड़ गई रो रोकर जीने के लिए।।
मेरे दिल के दर्द को
काश तुमने समझा होता
काश समझती तुम मेरी
आँखों की नमी को
मुझे छोड़कर तुमने है खोया
बहुत कुछ हाँ बहुत कुछ।।
मेरी आँखें क्या कहना चाहती थी
काश तुमने समझा होता
काश तुम समझती मेरे अंतर्मन को
पर तुमने तो एक पल में
मेरे सारे सपने को तहस-नहस कर
छोड़ गई मुझे खूं के आँसू रोने के लिए।।

