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GOPAL RAM DANSENA

Abstract Inspirational

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GOPAL RAM DANSENA

Abstract Inspirational

काल्पनिक

काल्पनिक

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कल्पना के सागर में गोते लगाने

वह दौड़ पड़ा कलम उठाकर

कि वह प्यार की भावनाओं को

उकेर देगा कागज के पन्नों पर

साहस की कोई सीमा कहां

कि बंध जाए किसी भंवर पर

गर्त से उठा लाया मोती

पहन ली माला धागे लगाकर

हरदम इंद्रधनुष नजर आते हैं

उल्फत के आकाश पर

उल्का बन अंगारे गिरे

प्रेम पथिक के मजनूं अंदाज पर

हम कहाँ अछूते रहे इस आबोहवा से

बैठ किनारे मजा लिए हर तरंग आघात पर


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