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Vikram Vishwakarma

Inspirational

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Vikram Vishwakarma

Inspirational

कालिदास

कालिदास

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201


ऋतुसंघारम, कुमारसम्भव, अभिज्ञान शाकुंतल,

डूबे रसिक प्रेमसरिता के बीच गहन जल निर्मल। 

मेघदूत, विक्रमोर्वशियम, महाकाव्य रघुवंशम,

नमन महाकवि कालीदास लेखनी तुम्हारी अनुपम।


कवियों के आदर्श मूर्ति तुम कवि कुलगुरू कहाते,

कविता प्रेमी काव्य तुम्हारे बड़े प्रेम से गाते।

जीवन मधुर रंग रस कृती से जन-जन को हर्षाया,

काली कृपा प्राप्त जनप्रिय वह कालीदास कहाया।


सरल, सुबोधित, सुगम, सरस शब्दों से काव्य सजाया,

इस कारण ही प्यार सभी का और अमर यश पाया।

अहोभाग्य हम सब ने जो अनमोल रतन यह पाया,

ऐसा कालीदास जगत में पुनः कभी ना आया।


नदियां, बादल और हिमगिरि जहां बसे त्रिपुरारी,

सभी समेटे हुए स्वयं में अनुपम स्मृति तुम्हारी।

ऋणी तुम्हारा भारतीय हर एक कवि जन जन है,

अमर रहो कविराय सदा हम करते तुम्हें नमन हैं।



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