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Neha Pandey

Abstract

2.5  

Neha Pandey

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जवाब दे पाओगे क्या ?

जवाब दे पाओगे क्या ?

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जेहन में जलते-बुझते से

कुछ सवाल हैं मेरे

जवाब दे पाओगे क्या ?


कभी जो रूठ जाऊँ मैं 

तो खुद ही मान जायेगी

कहकर चले जाओगे क्या ?


तुम्हारे ही नाराज होने पर 

अगर आंसू मेरे निकले,

तो ख़ुद पर काबू रखकर 

मेरे आंसू रोक पाओगे क्या ?


मेरी नासमझ बातों में

पागल कहकर मुझे

मुस्कुरा पाओगे क्या ?


तुम्हें नापसंद होने पर भी

बारिश में मेरे साथ

भीग पाओगे क्या ?


जिंदगी की कश्मकश में 

पिछली कुछ बातें 

भूल जाओगे क्या ?


मेरी गलतियां, मेरी लापरवाही

कभी ज्यादा हो जाये तो

दिल से माफ़ कर पाओगे क्या ?


मैं कभी हार मान लूँ 

जिंदगी की उलझनों से,

तो हाथ थामकर मेरा

हौसला बन पाओगे क्या ?


अंजान नहीं मैं कि

मुश्किल है सब कुछ

पर मेरे साथ चल कर 

जिंदगी आसान

बना पाओगे क्या ?


जितनी उम्मीद

मैंने की है तुमसे

उतनी ही तुम्हें भी

होगी मुझसे,

फिर भी शुरुआत तुम

पहले कर पाओगे क्या ?


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