ज़ुर्म_ए_इश्क़
ज़ुर्म_ए_इश्क़
सुनो ..
कभी किया है सबसे छुपकर...
पलकों के कोनों से दीदार किसी का ,
और नज़रें मिलते ही नज़रें यूँ फेर लेना
जैसे कोई ज़ुर्म हो गया हो ख़ुद से ।
गर हॉ तो इश्क़ ने तुम्हें भी छुआ था कभी ...
किसी की ख़ातिर तुमने भी ख़ुद को परेशां किया था कभी ।।

