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sajida Qureshi

Classics

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sajida Qureshi

Classics

जुलाह

जुलाह

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**जुलाहे**
ज़िन्दगी को खुश होने के बहाने मिलें 
सब उम्मीदों को मनचाहे ठिकाने मिलें
सारी कायनात को मनचाही ख़ुशियां मिलें
हर एक का मुस्तक़बिल हो रोशन जहाॅं में
यूं ना मायूस हो कोई उसकी रज़ा मानकर 
ज़िन्दगी को ख़ुश होने के बहाने मिलें
सब उम्मीदों को मनचाहे ठिकाने मिलें
रिदा सब के ख़्वाबों की, हो मुकम्मिल
जुलाहे को अब के, ऐसे ताने बाने मिले

*रिदा=चादर
**जुलाहे का प्रयोग ईश्वर/ख़ुदा के सन्दर्भ में
**मुक़म्मिल =पूरी
**मुस्तकबिल=भविष्य
**कायनात=ब्रह्मांड
**मायूस=निराश
**रज़ा=मर्ज़ी इच्छा


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