जरूरी तो नहीं
जरूरी तो नहीं
जो नजर आये वही हो यह जरूरी तो नहीं,
हर आंखों से सावन बरसे यह जरूरी तो नहीं ,
कभी कभी यूं भी हम दिल को बहला लेते हैं ,
हर मुस्कुराहट के पी़छे खुशियां हों जरूरी तो नहीं..!
कभी कभी बिन मौसम भी बरसात हो जाती है,
अश्कों के साये में कई रात कहीं खो सी जाती है,
मशक्कतें कई करनी पड़ती हैं सिरहाने नींद के लिये,
बंद पलकों में ख्वाब ही सजे हों ऐसा जरूरी तो नहीं..!
शिकायतों के पुलिंदे इस ठंड में अलाव के नाम कर दिये,
गर्म आंच पर शबनम जला कर उड़ता भाप कर दिये,
सूख जाते हैं जो झरने बहते उनकी नमी ढूंढें अब कहां,
नाम तुम्हारा निकलेगा मेरे लबों से ऐसा जरूरी तो नहीं..!
सर्द है मौसम बहुत दिलों में बर्फ सी जमने लगी है,
हो गयें हैं खुश्क मंजर बहता दरिया दिखता नहीं है,
काश इक आस अब तलक जिंदा रहती मेरे भीतर कहीं,
पत्थर बन जाये इंसा खा खा कर ठोकरें ऐसा जरूरी तो नहीं ..!
