जो रात गई सो बात गई
जो रात गई सो बात गई
जो रात गई सो बात गई
नए दिन की करो तुम
अब तो कोई बात नई...,
खुद पर न कोई,आघात करो
दिल में न कोई बात धरो
खड़ा नव-दिवस,बाँह पसारे
हँस कर सारे घाव भरो,
उगता सूरज कहता है ये
करो तुम शुरूआत नई,
जो रात गई सो बात गई...,
माना छाया है अँधियारा
समझो न तुम खुद को हारा
भर आँचल में किरणों को
छाने दो अब तो उजियारा,
अंतर्मन में ढूँढ लो तुम
अपनी अब राह नई
जो रात गई सो बात गई...,
छोड़ो,जो रूठा सो रूठा
छोड़ो,जो टूटा सो टूटा,
न छोड़ो आने वाले पल को
पीछे,जो छूटा सो छूटा,
हर पतझड़ के बाद ही
आखिर पैदा होती है
शाख नई,
जो रात गई सो बात गई।
