जो अपना ना था
जो अपना ना था
क्यों डरते हैं हम कुछ खोने से,
जो अपना ना था उसपे रोने से,
खाली हाथ आए थे सभी ,
खाली हाथ ही जाएंगे,।
रिश्ते नाते सब यहीं बने,
सब यहीं धरे रह जायेंगे ,
रिश्तों की नाजुक डोर में बंधे,
सब कुछ कर निकल जायेंगे,।
कौन था अपना कौन पराया ,
किसकी चाहत किसकी छाया,
अपनी नही है जब ये काया,
तब क्यों रोएं हम इस माया।
