STORYMIRROR

ललित सक्सैना

Abstract Drama Tragedy

4  

ललित सक्सैना

Abstract Drama Tragedy

जिंदगी

जिंदगी

1 min
411

कुछ दबी दबी सी ख्वाहिशें

कुछ मंद मंद मुस्कुराहटें

कुछ खोए हुए सपने

कुछ अनसुनी आहट

कुछ दर्द भरे लम्हे

कुछ सुकून भरे लम्हात

कुछ थमे हुए तूफ़ान

कुछ मद्धम सी बरसात

कुछ अनकहे अल्फाज़

कुछ न समझ इशारे

कुछ उलझी उलझी राहें

कुछ कोशिशें बेहिसाब

यही तो जिंदगी है जनाब

सच यही है जिंदगी.....यही है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract