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Kavita Verma

Abstract Drama

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Kavita Verma

Abstract Drama

जिंदगी

जिंदगी

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जाने किसमें क्या 

तलाशती है जिंदगी 

एक अनबुझी प्यास सी जिंदगी 

प्यास में भी आस को 

तलाशती है जिंदगी। 


मिले जो राहों में 

ठिठक कर उनका 

साथ चाहती है जिंदगी 

चलते चार कदम साथ उनके 

उन्हें अपना सा ढालना 

चाहती है जिंदगी।


ढले जो मन के अक्स में 

उस पर इठलाती है जिंदगी 

फिर क्यों बदलने की 

शिकायत करती है जिंदगी 


बदलती राहों में 

साथ पुराना चाहती है जिंदगी 

फिर क्यों हर नयी राह  पर 

बदलाव चाहती है जिंदगी। 



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