STORYMIRROR

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Fantasy Inspirational

4  

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Fantasy Inspirational

जिंदगी, मेरे घर आना

जिंदगी, मेरे घर आना

1 min
172

जिंदगी, मेरे घर आना जिंदगी,

क्योंकि मेरे घर में सब धर्मों का आदर होता है 

पुण्य का पहरा है , पाप यहां आते रोता है 

छुआछूत जैसी कोई बीमारी नहीं है 

नारी के अपमान की लाचारी नहीं है 

यहां संवेदनाएं बेखौफ जीवन जी रही हैं 

भावनाएं और मजबूती से प्रकट हो रही हैं 

यहां बड़ों को सम्मान दिया जाता है 

छोटों से प्यार दुलार किया जाता है 

बहू बेटी में कोई अंतर नहीं करता 

दहेज वगैरह का कोई मंतर नहीं पढ़ता 

यहां सभ्यता और संस्कृति वास करती है 

लाज, शर्म, मर्यादा मजे से अधिवास करती है 

मांसाहार के लिए कोई स्थान नहीं है 

नशे का भी यहां कोई सामान नहीं है 


आशा की किरणों से उजाला रहता है 

दीन दुखियों को रोज निवाला मिलता है 

पशु पक्षियों से बेहद प्रेम है सबको 

पेड़ पौधों से जीवन मिलता है सबको 

गंदगी का कोई नामोनिशान नहीं है 

खैनी , पान मसाला से कोई परेशान नहीं है 

वातावरण में सुविचारों की शुद्धता है 

नकारात्मकता पर पूर्ण विराम लगा रखा है 

उल्लास और उमंग की महक भरी हुई है 

संतोष के हथौड़े से लालच की भावना डरी हुई है 

इस घर पर वात्सल्य की बारिश हो रही है 

जो सबको एकसूत्र में पिरो रही है 

सब कुछ तुम्हारे अनुकूल है यहां पर 

खुशियों का मेला है जन्नत सा माहौल है यहां पर 

इसलिए, मेरे घर में ही आना, ए जिंदगी 

अब चलेगा ना कोई बहाना, ए जिंदगी । 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Fantasy