STORYMIRROR

Minal Aggarwal

Tragedy

4  

Minal Aggarwal

Tragedy

जिन्दगी की कहानी

जिन्दगी की कहानी

1 min
374

आज 

एक कहानी सुनाती हूं 

किसी की जिन्दगी की कहानी 

लोग कैसे करते हैं खत्म 

यह राज बताती हूं 

बिना बात 

उलझते हैं 

सामने पड़ने पर 

गाल पर चांटा जड़ते हैं 

किसी को कमजोर जान 

उसकी मजबूरी का फायदा उठा 

उसे जिंदा 

एक अजगर सा

निगलते हैं 

उसके चेहरे पर 

मुस्कान आने ही नहीं 

देते 

उसका दिल 

एक कांच के खिलौने सा

बार बार तोड़ते हैं 

उसका हौसला गिराते हैं 

उनका जो बस चलता है तो

जमीन से भी नीचे 

कोई जगह हो तो

उस शरीफ व्यक्ति के 

आत्मसम्मान को वहां भी

गाड़ते हैं

शारीरिक यातनायें देते हैं 

मानसिक प्रताड़नायें भी

आत्मविश्वास को तोड़ने की 

पुरजोर कोशिश 

हर समय, हर पल 

जीवन की पहली सांस से 

उस अभागे की आखिरी सांस 

तक करते हैं 

पांव में अड़ंगी डालते हैं 

मुंह के बल गिराते हैं 

जीने नहीं देते 

मरने नहीं देते 

ठीक से सांस लेने भी 

नहीं देते 

अच्छा व्यवहार भी उन्हें 

रास नहीं आता 

न करो बात तो 

रही सही इज्जत का जनाजा ही

निकल जाता 

हर बात की है 

काट 

सब कुछ उल्टा पुल्टा 

जैसे जैसे उम्र बढ़ रही 

वैसे वैसे बददिमागी भी 

भगवान कहीं विराजमान हैं तो 

ऐसे कमसमझ लोगों को 

सद्बुद्धि दें

खुद जिये दूसरों को भी जीने 

दें

इस सबक की शिक्षा 

दें

गर्म लू के थपेड़ों से तप रही रेत में 

कहीं से तो ठंडे पानी के छींटे 

मारें

दिल के हरदम उफनते

क्रोध के लावे में

कहीं से तो 

प्रेम के शीतल जल का 

फव्वारा फोड़ें।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy