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Rajit ram Ranjan

Classics

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Rajit ram Ranjan

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जिंदगी कि दौड़ में हार गया हूँ

जिंदगी कि दौड़ में हार गया हूँ

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बस, अब जिंदगी की दौड़ में

हार गया हूं मैं,

समझ नहीं आता

कि क्या करूं।


यूं ही

तन्हा अकेले,

अब तो जवानी भी

साथ छोड़ रही है।


ढल रही है धीरे-धीरे उम्र

और मानसिक संतुलन भी

बिगड़ रहा है क्या करूं।


बस अब और

नहीं होगा

बर्दाश्त नहीं होता।


ए जिंदगी

तुझ पर

मैं सब कुछ वार

गया हूं।


बस, अब जिंदगी की

दौड़ में

हार गया हूँ !


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