जीवन आधार
जीवन आधार
तुम मेरा आधार हो
चलो सवाँर लूँ तुमको
कुछ सपने मेरे रंगीन बन जाएंगे
कुछ दुलार लूँ तुमको।
बस दो बूंद पानी देकर
हरियाली बटोर लूंगा मैं
एक मुठ्ठी जमीन देकर
छाया सहेज लूँगा मैं।
तुम्हारे यौवन की छाया में
कितने बचपन पल जाएँगे
एक आंधी थम जाएगी
कितने पतझड़ गुज़र जाएँगे।
न आंच किसी पर आएगी
न हम पत्थर कहलाएंगे।

