STORYMIRROR

Preeti Vaish

Romance

2  

Preeti Vaish

Romance

जीवन आधार

जीवन आधार

1 min
244

तुम मेरा आधार हो

चलो सवाँर लूँ तुमको

कुछ सपने मेरे रंगीन बन जाएंगे

कुछ दुलार लूँ तुमको।


बस दो बूंद पानी देकर

हरियाली बटोर लूंगा मैं

एक मुठ्ठी जमीन देकर

छाया सहेज लूँगा मैं।


तुम्हारे यौवन की छाया में

कितने बचपन पल जाएँगे

एक आंधी थम जाएगी

कितने पतझड़ गुज़र जाएँगे।


न आंच किसी पर आएगी

न हम पत्थर कहलाएंगे।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance