STORYMIRROR

Preeti Vaish

Others

2  

Preeti Vaish

Others

रंग भरे बादल

रंग भरे बादल

1 min
167

कि ख्वाहिश है,बादल को रंगू

आज मैं आसमान पर चढूं

कद्र किसको है कि अपना वजूद रखूँ

क्यों न मिटा दूँ और बादल तक चलूं।।

रंग सारे अपने साथ ही ले चलूँ

सपने अपने बनाकर देख लूँ

क्यों दुनिया के तिरस्कार को दिल में रखूँ

आज ख्वाहिश है कि बदल तक चलूँ।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन